आस्था का महापर्व - छठ
आस्था का महापर्व - छठ
1. आस्था का महापर्व छठ बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। दिवाली खत्म होते ही इन राज्यों में छठ पूजा की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। अब तो ये पर्व देश के अन्य हिस्सों यथा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता इत्यादि शहरों में भी धूमधाम से मनाया जाने लगा है। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड से आकार इन स्थानों पर बसे लोग अब छठ पर्व यहीं मनाने लगे हैं तथा धीरे-धीरे यह पर्व इन स्थानों पर भी काफी प्रचलित हो चुका है।
2. छठ पर्व का अपना एक विशेष महत्व है। मान्यता के मुताबिक अगर कोई व्रती सच्चे मन से छठ पूजा कर भगवान भास्कर की अराधना करे, तो उसकी हर मुराद पूरी होती है। ऐसी मान्यता है कि छठ की देवी, यानि कि छठी मैया भगवान सूर्यदेव की बहन हैं। छठी मैया को प्रसन्न करने हेतु भक्तगण भगवान भास्कर यानि भगवान सूर्य की अराधना करते हैं और उनका धन्यवाद करते हुये किसी नदी, पोखर या तालाब के किनारे पूजा-अर्चना करते हैं। छठ पूजा कर रहे इन व्रतियों को विशेषकर पटना में 'परवइतिन' कहा जाता है।
3. यह पूजा कुल चार दिनों का होता है। नहाय-खाय से शुरू इस पूजा के दौरान दूसरे दिन लोंहर, तीसरे दिन शाम का अर्ध्य तथा चौथे और अंतिम दिन सुबह का अर्ध्य होता है और फिर उसके बाद पारण के साथ ही यह पूजा सम्पन्न हो जाता है।
4. छठ पर्व सही माने में उपासना के साथ-साथ सद्भाव का पर्व होता है। पूरे पूजा के दौरान सारे शहर, कस्बें, गाँव में स्वच्छता एवं पवित्रता का माहौल बना रहता है। वैसे लोग, जिनके घर-परिवार में पूजा नहीं हो रहा होता, वे भी बढ़-चढ़ कर पोखर, नालों, नदी-घाटों, गलियों, सड़कों की सफाई के कार्य में हिस्सा लेते हैं। सरकारें एवं स्थानीय निकाय तो पूरी तरह से इन कार्यों में लगे रहते ही हैं। ऐसी भी मान्यता है कि पूजा के दौरान अभद्रता, अपराध एवं अश्लीलता करने वालों को भगवान भास्कर तुरंत दंड देते है। शायद यह भी एक कारण है कि सम्पूर्ण पूजा के दौरान इन राज्यों में कानून व्यवस्था कि स्थिति भी काफी बेहतर रहती है।
5. इस महापर्व के बारे में कई पौराणिक कथाएँ भी प्रचलित है। सबसे ज्यादा माने जाने वाली एक कथा के अनुसार, भगवान राम के ऊपर रावण की हत्या के कारण ब्राह्मण हत्या का दोष लगा था। इस दोष से मुक्ति हेतु उन्होनें ऋषियों-मुनियों कि सलाह से राजसूर्य यज्ञ किया। इस यज्ञ के लिए ऋषि मुद्गल को अयोध्या आमंत्रित किया गया था। मुद्गल ऋषि ने माँ सीता को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष कि षष्ठी तिथि को सूयदेव कि उपासना करने को कहा। इसके बाद माँ सीता ने मुद्गल ऋषि के आश्रम, जहां पर आज बिहार राज्य का मुंगेर शहर बसा है, में रहकर छह दिनों भगवान सूर्यदेव की पूजा की। तभी से यह पर्व छट पर्व के रूप में मनाया जाने लगा।

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